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GUM
सच ये है बेकार हमें गुम होता हैजो चाहा हो दुनिया मे कूम होता है ढलता सूरज, फैला जुन्गळ रूस्ता गुम हम से पूछो कैसा आलम होता है... गैरों को कूब फुर्सत है दुख देने की जुब होता है कोई अपना होता है ..... जख्म तो हमने इन आँखों से देखें हैं लोगों से सुनते हैं मूरहम होता है.. सच ये है बेकार हमें गुम होता है... ग़ज़ल गायक : जगजीत सींग "विवेक पटनायक"
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