|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| |
|
|
|
HAQEQAT
वक्त की बोझिल फेहरिस्त सेचुराना चाहता था कुछ लम्हे समेटना चाहता था कुछ कतरे खुशी के बुनना चाहता था अक रिश्ता अनगढा, अपना सा... गुजारना चाहता था कुछ पल फुरसत के बनाना चाहता था अक घरौंदा सुख-दुख के तिनके समेटकर सहेजकर रखने चाहता था तुम्हारे साथ बिताए पल चाहता था साथ तेरा नब्ज़ के थमने तक... पर अचानक आंधी सी आई टूटे सारे सपने अपने तुम हो गई किसी की और रह गया मई तन्हा क्या यह थी मेरी किस्मत तुम सपना थी या की हक़ीक़त अब तो यूँ ही कटती है धड़कन साँसों को तरसती है.... विवेक पटनायक 23.1.08
|
|
| | |
|
|
|
|
|
|
|